डासना जेल में रातभर जागा कुख्यात गैंगस्टर आशु जाट, बेटी को याद कर बार-बार रोया

12 साल से अपराध की दुनिया में कदम रख एनसीआर और दिल्ली में खौफ पैदा करने वाला आशु मुंबई में अपने भाई द्वारा बनाए गए प्लान के बाद बदायूं आदि के लोगों के साथ रहा था। जहां पर कोरोना काल के सात माह फल बेचकर ईमानदारी से करीब साढ़े 3 लाख रुपये कमाए थे।
गाजियाबाद के काजीपुर गांव में किसान के घर जन्मे आशू तथा भोला का दिल्ली एनसीआर में आतंक है। दोनों भाइयों ने जहां मिर्ची गैंग बनाया वहीं इनकी पत्नी, मां, सास और ससुर तक हवालात की हवा खा चुके हैं। बच्चे भी बचपन में सलाखों की पीछे रह चुके है। परंतु भोला जाट का आर्शिवाद जेल के अंदर से ही चलता रहता है। बताया गया है कि आशू 12 वीं पास है, जिसने ज्यादा कुछ हाईटेक होने की जरुरत नहीं समझी थी। वह मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता है, लेकिन जेल में बंद भोला जाट ने ही आशू को दिल्ली में हापुड़ पुलिस की 26 जनवरी को दबिश के बाद मुंबई के लिए भेज दिया था। सीओ सिटी राजेश सिंह का कहना है कि आशू को भोला जाट ने ही अपने आदमियों से कहकर मुंबई में ठिकाना कराया था। आशु जो बी गैंग चला रहा था उसका ताना बाना जंल के अंदर से भोला बुल रहा था।चंबल की तरह चल रहा था गैंग--पुलिस की मानें तो किसी भी गैंग के सदस्य के पास अपना मोबाइल नहीं होता है। कोई भी मोबाइल और सिम तक नहीं खरीदता है। या तो चिट्ठी लिखकर भेजी जाती है, या फिर चिट्ठी लिखकर किसी अनजान का मोबाइल मांग लिया जाता है। जिसको बहला फुसला कर चिट्ठा का फोटो व्हाटसएप पर खींच कर दूसरे को भेज दिया जाता है, जो बिल्कुल नया गैंग में जुड़ता है। उसे भेजकर चिट्ठी को जेल में भोला को पढ़ा दिया जाता है। हाईटेक युग में यह गैंग किसी भी ऐसी चीज का इस्तेमाल नहीं करता तो सर्विलांस पर आ सके।पहली बार नेकी की कमाई साढ़े तीन लाख--अगर पुलिस की माने तो 1 फरवरी को आशु मुंबई पहुंच गया था। जिसने अपने भाई भोला के आदमियों के साथ मिलकर फल बेचने का काम शुरू कर दिया था। भेष बदलकर वह दीवार के पास नाले के ऊपर फल बेच रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि 12 साल से लूट कर दौड़ता रहा, जबकि फल बेचकर ईमानदारी के साढ़े तीन लाख रुपये कमा लिए थे।
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