अभी आई खबर में कोरोना से संक्रमित रोगी हो रहे हैं इस दवा से 50 फ़ीसदी ठीक ?
डेक्सामेथासोन को एक सफलता के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। क्योंकि स्टेरॉयड गंभीर रूप से बीमार कोरोना संक्रमित रोगियों में मृत्यु दर की कमी प्रदर्शित कर रहा है। कोरोनावायरस के उपचार के लिए विश्व में इस तरह के सबसे बड़े परीक्षण ब्रिटेन में एक परीक्षण में पाया है कि डेक्सामेथासोन की कम मात्रा एक रॉवेटिलेटर पर एक कोरोना से संक्रमित रोगी को बचा सकती है।
भारत अभी भी डेक्सामेथासोन को लेकर सावधान है तथा इस पर लगातार रिसर्च हो रही है। क्योंकि इस स्टेरॉयड का वैज्ञानिक परीक्षण अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक आंकड़ों से पता चलता है कि जिन रोगियों को वेंटिलेशन की जरूरत थी उन्हें डेक्सामेथासोन दिए जा रहे हैं तथा इससे उनकी मृत्यु दर का प्रतिशत 41% से 28% तक गिर गई है। जो मध्यवर्ती रोगी होते हैं जिन्हें केवल ऑक्सीजन की सहायता की आवश्यकता होती है डेक्सामेथासोन के कारण मौत को पांच फ़ीसदी घटा दिया गया है। जहां प्रत्यक्ष रूप से देखभाल के दौरान 25 प्रतिशत ऑक्सीजन वाले रोगियों की मृत्यु हो गई तथा वही डेक्सामेथासोन से 20 प्रतिशत की मृत्यु हो गई।
भारत में डेक्सामेथासोन दवा के लिए एक सतर्क दृष्टिकोण बनाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक ICMR अधिकारी ने कहा उच्च रक्तचाप के लिए स्टेरॉयड देना मधुमेह रोगियों को भारी पड़ सकता है। अगर इस दवा का परीक्षण अच्छे से सफल हो जाता है तो यह इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे सस्ती दवा होगी। भारत में covid-19 इलाज योजना के लिए नोडल एजेंसी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने घातक वायरस के लिए आश्चर्यजनक दवा के रूप में डेक्सामेथासोन के प्रयोग के प्रति सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है।
खास बात यह है कि भारत डेक्सामाथोसन का सबसे बड़ा निर्माता है जो एक टेबलेट के रूप में भी इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है। अकेले भारत में 20 से अधिक कंपनियां यह दवा बेचती है और यह दवा बाजार में सस्ते दाम में मिल जाती है ब्रिटेन ने तो इस दवा का भंडारण शुरू कर दिया है। सूत्रों से पता चलता है कि डेक्सामिथोसन से कोविड-19 के रोगियों की मृत्यु दर में कमी आती है।

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